आओ कुछ आश्चर्यजनक तथ्य (facts)के बारे जानते है,हवाई जहाज हवा में कैसे उड़ता है?
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❇️ Q. बैंगन को काटने पर वो तुरंत काले रंग का क्यों हो जाता है?
Ans: जब बैंगन को काटा जाता है तो उसकी सतह गहरे भूरे रंग की होने लगती है| यह एंजाइम के कारण होता है बैंगन को काटने पर एंजाइम सतह पर हवा के संपर्क में आती है| जिसके कारण ऑक्सीकरण की क्रिया होती है और सतह का रंग गहरा भूरा हो जाता है| इसी प्रकार सेव को काट कर खुला रखने पर भी रंग परिवर्तन होता है|
❇️ Q. मृदु पेय पदार्थो की बोतलों को खोलने पर पेय पदार्थ झाग के साथ बाहर निकलता है क्यों?
Ans: मृदु पदार्थो में कार्बनडाइ ऑक्साइड को उच्च दाब पर भरा जाता है जैसे ही बोतलों का ढक्कन खोला जाता है यह गैस उच्च दाब से निम्न दाब की ओर बहती है तथा झाग के रूप में बाहर निकलती है।
❇️ Q. भीगने पर कपड़े गहरे क्यों दिखाई देते हैं?
Ans: प्रत्येक पदार्थ का अपना एक विशेष अपवर्तानांक होता है तथा कपड़े रेशों के बने होते है। सूखे कपड़े के रेशों में हवा भरी होती है जब प्रकाश किसी कपड़े पर गिरता है तो प्रकाश इन रेशों के अन्तरापृष्ठों पर प्रकीर्णित होता है जिससे कपड़े का रंग हल्का दिखाई देता है किन्तु जैसे ही कपड़ा भीगता है, पानी को सोख लेने से रेशे के मध्य हवा नहीं रहती है जिससे प्रकाश का प्रकीर्णन नहीं हो पाता है जिससे कपड़े गहरे दिखाई देता है।
❇️ Q. जलने पर ट्यूब लाइट से आवाज क्यों आती है?
Ans: जब ट्यूब लाइट को जलाया जाता है तो एक ख़ास तरह की आवाज आती है और यह आवाज एक निश्चित समयान्तर से बढ़ती जाती है क्योंकि प्रत्येक ट्यूब लाइट में चौक का प्रयोग किया जाता है।चाक छोटी-छोटी स्टील की प्लेटों की बनी होती है। ये प्लेटें एक के ऊपर एक इस तरह से रखी जाती है कि इनके बीच कुचालक पदार्थ या माध्यम डाला जा सके। काफी समय तक जब ट्यूब लाइट जल चुकी होती है तो कुचालक पदार्थ काला पड़ जाता है और प्लेटों के बंध ढ़ीले पड़ जाते हैं। जब प्रयावर्ती धारा बहती है तो उसमें कम्पन्न उत्पन्न होने लगती है तथा ट्यूब लाइट के चलाने पर आवाज आने लगती है, जो समय के साथ धीरे-धीरे बढ़ने लगती है। यह आवाज और भी तेज़ सुनाई देती है। जब प्रतयावर्ती धारा की आवृति चाक में लगी प्लेटों के कम्प्न्नों से उत्पन्न तरंग की आवृति से मेल खाने लगती है। ऐसा अनुनाद होने से आवाज होती है।
❇️ Q. हवाई जहाज हवा में कैसे उड़ता है?
Ans: हवाई जहाज का इंजन की वजह से नहीं बल्कि अपने पंख के आकर की वजह से उड़ पाना सम्भव हो पाता है। पंख की इस विशेष बनावट को एरोफाइल कहते हैं। इस एरोफाइल की विशेषता यह है कि पंख के ऊपर और नीचे से गुजरने वाली हवा को पीछे जाकर एक ही समय पर मिलने के लिये ऊपर से होकर जाने वाला हवा को नीचे से होकर जाने वाली हवा से तेज़ चलना पड़ता है। वायु की गति जितनी तेज़ होती है उसका दबाव उतना ही कम होता है। पंख के ऊपर वाले भाग में वायु का दाब , नीचे वाले भाग की तुलना में कम होगा, जिससे पंख ऊपर उठने को बाध्य होंगे वायुदाब के अंतर द्वारा उत्पन्न वह बल जिस के कारण वायुयान ऊपर उठने को मजबूर हो जाता है, उत्थापक बल कहलाता है। इंजन का काम तो होता है वायुयान को तेजी के साथ वायु के बीच से गुजारना ताकि उत्थापक बल द्वारा यह ऊपर उठाया जा सके।
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