क्रिकेट विश्व कप

 क्रिकेट विश्व कप * आईसीसी क्रिकेट विश्व कप एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट की अंतरराष्ट्रीय चैम्पियनशिप है * टूर्नामेंट खेल के शासी निकाय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) द्वारा हर चार साल पर आयोजित किया जाता है * यह टूर्नामेंट दुनिया में सबसे ज्यादा देखी गयी खेल स्पर्धाओं में से एक है, यह केवल फीफा विश्व कप और ओलंपिक से ही पीछे है * पहली बार विश्व कप 1975 में इंग्लैंड में आयोजित किया गया था * पहले तीन विश्व कप इंग्लैंड में मेजबानी किए गए थे लेकिन 1987 टूर्नामेंट के बाद से विश्व कप हर चार साल मे दूसरे देश में आयोजित किया जाता है * अब तक के विश्व कप और मेजबान देश तथा विजेता > वर्ष - मेजबान - विजेता > 1975 - इंग्लैंड - वेस्टइंडीज > 1979 - इंग्लैंड - वेस्टइंडीज > 1983 - इंग्लैंड - भारत > 1987 - भारत, पाकिस्तान - ऑस्ट्रेलिया > 1992 - ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड - पाकिस्तान > 1996 - भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका - श्रीलंका > 1999 - इंग्लैंड - ऑस्ट्रेलिया > 2003 - दक्षिण अफ्रीका - ऑस्ट्रेलिया > 2007 - वेस्टइंडीज - ऑस्ट्रेलिया > 2011 - भारत, बांग्लादेश, श्री...

आज का प्रेरक प्रसंग *!! श्रेष्ठता !!*




               *!! श्रेष्ठता !!*

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ठंड के मौसम में कुछ बंदर पेड़ की डाली पर ठिठुर रहे थे, तभी उनको पास में जुगनू उड़ता हुआ दिखाई दिया, बंदरों ने सोचा शायद यह आग की चिंगारी है। उन्होंने उस जुगनू को पकड़ कर सुखी पत्तियों पर रगड़ना और फूँक मारनी शुरू की ताकि आग उत्पन्न हो और उनकी ठंड भागे, पर कुछ ही देर में वह जुगनू मर जाता है, बगल की डाली पर बैठी चिड़िया ने बोला- अरे यह आग की चिंगारी नहीं, जो तुम लोग इससे आग निकाल रहे, यह तो एक जुगनू है। क्या तुमने मुझे इसे खाते हुए नहीं देखा? यदि यह आग की चिंगारी होती तो मैं जल नहीं जाती? तुम लोग बेकार की मेहनत कर रहे हो, इतना सुनते ही उन बंदरों को गुस्सा आ जाता है और वे चिड़िया को मार देते हैं।


ध्यान देने वाली बात यह है कि हमारी आधी ज़िंदगी ऐसे ही कई बेकार प्रयासों में बीत जाती है, कोई शीशे में अपना चेहरा देख कर अभिनेता बनने चल पड़ता है, तो कोई गायक को देख कर गायक बनने का सोचने लगता है ऐसे बहुत से उदाहरण हैं, पर जीवन बीत जाता है और सफलता हाथ नहीं लगती, क्या हम आग की आशा में किसी ना किसी जुगनू को नहीं फूँक रहें, जब चिड़िया ने बंदरों को समझाया तो उन्होंने उसे गुस्सा हो के मार दिया उसी तरह हमारी ज़िंदगी में भी अगर हमें कोई कहता है कि जो तुम सपने देख रहे हो वो सही नहीं है तो क्या हमें भी गुस्सा नहीं आता?


अब एक बात बताईए कहा जाता है कि जब कोई किसी सपने के साथ कड़ी मेहनत करता है तो उसे सफलता जरूर मिलती है, वहीं दूसरी ओर यह बोला जाता है कि हर सपना सच नहीं होता तो हम क्या माने और क्या ना माने? जब व्यक्ति को लगता है कि उसे किसी के सलाह की ज़रूरत नहीं और उसके लिए गए फैसले 100% सही हैं तो हाँ यह श्रेष्ठता की पहचान है, पर सिर्फ मैं ही सही हूँ यह अहंकार है।


कहानी के बंदरों ने चिड़िया को मारते समय यही बोला था कि हम इतने बड़े और ताकतवर हैं, हमें तुम्हारे सलाह की आवश्यकता ही नहीं, इस झूठे भावना के कारण वे बंदर आज भी जुगनू को फूँक मार कर आग जलाने की कोशिश में ठिठुर रहें हैं। 


*शिक्षा:-*

समय आने पर जुगनू और चिंगारी का अंतर समझना बहुत आवश्यक है। अपनी कीमत और योग्यता आपको समझनी होगी।


*सदैव प्रसन्न रहिये।*

*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*

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